विष दोष वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण ग्रह योग माना जाता है। सामान्यतः जन्म कुंडली में चंद्रमा और शनि की युति या परस्पर प्रभाव होने पर विष दोष बनने की संभावना मानी जाती है। चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि शनि कर्म, अनुशासन, देरी और कठिन परिस्थितियों से संबंधित ग्रह माना जाता है। इन दोनों ग्रहों के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में मानसिक दबाव और भावनात्मक उतार-चढ़ाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विष दोष के कारण मानसिक तनाव, चिंता, नकारात्मक विचार, अकेलापन, निर्णय लेने में कठिनाई और कार्यों में देरी जैसी परिस्थितियों का सामना करने की मान्यता है। वैवाहिक जीवन में भी गलतफहमी, भावनात्मक दूरी या आपसी मतभेद देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, केवल चंद्रमा और शनि की युति देखकर विष दोष के प्रभाव का निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। कुंडली के भाव, राशि, ग्रहों की शक्ति, शुभ दृष्टि और अन्य योगों का भी अध्ययन आवश्यक होता है।
विष दोष के निवारण के लिए ज्योतिषीय परंपराओं में भगवान शिव की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शनिवार को शनि देव की उपासना, जरूरतमंदों को दान और नियमित ध्यान जैसे उपाय बताए जाते हैं। सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
विष दोष से संबंधित किसी भी निष्कर्ष या उपाय के लिए संपूर्ण जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाना उचित है। सही ज्योतिषीय मार्गदर्शन से दोष की तीव्रता और संभावित निवारण उपायों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

