विवाह में लगातार तनाव, मतभेद और भावनात्मक दूरी के कारण कई बार दांपत्य जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजर सकता है। वैदिक ज्योतिष में वैवाहिक समस्याओं और तलाक की संभावनाओं का अध्ययन मुख्य रूप से सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, गुरु, मंगल, राहु-केतु तथा दशा-अंतर्दशा के आधार पर किया जाता है। कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दृष्टि और आपसी संबंधों का विश्लेषण करके वैवाहिक जीवन से जुड़े संभावित संकेतों को समझने का प्रयास किया जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सप्तम भाव पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव, सप्तमेश की कमजोरी, शुक्र की पीड़ित स्थिति या कुछ विशेष ग्रह योग वैवाहिक तनाव, अलगाव, बार-बार विवाद और रिश्ते में दूरी के संकेत माने जा सकते हैं। हालांकि, किसी एक ग्रह या दोष के आधार पर तलाक का निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। दोनों जीवनसाथियों की कुंडली, वर्तमान दशा और गोचर का विस्तृत अध्ययन आवश्यक माना जाता है।
वैवाहिक संबंध सुधारने के लिए शिव-पार्वती की पूजा, शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा, शुक्र मंत्र का जाप और जरूरतमंदों को दान जैसे पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय बताए जाते हैं। इसके साथ ही जीवनसाथी के साथ शांतिपूर्ण संवाद, एक-दूसरे का सम्मान और समस्याओं को समझने का प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि विवाह में गंभीर विवाद चल रहा हो, तो ज्योतिषीय उपायों के साथ विवाह परामर्श या योग्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर की सहायता लेना भी उपयोगी हो सकता है। किसी भी प्रकार के हिंसा या असुरक्षित व्यवहार की स्थिति में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
कुंडली के आधार पर व्यक्तिगत स्थिति समझने के लिए दोनों की जन्म तिथि, समय और स्थान के अनुसार विस्तृत विश्लेषण करवाया जा सकता है।

