अंगारक दोष वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण ग्रह दोष माना जाता है। यह दोष सामान्यतः जन्म कुंडली में मंगल और राहु की युति होने पर बनता है। मंगल ऊर्जा, साहस, क्रोध और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु भ्रम, अस्थिरता और अचानक आने वाली परिस्थितियों से जुड़ा ग्रह माना जाता है। दोनों ग्रहों के एक साथ होने पर व्यक्ति के स्वभाव और जीवन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
अंगारक दोष के प्रभाव से क्रोध, तनाव, अधीरता, विवाद, निर्णय लेने में जल्दबाजी और कार्यों में बाधा जैसी स्थितियां उत्पन्न होने की मान्यता है। कुछ मामलों में करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संबंध और वैवाहिक जीवन पर भी इसका प्रभाव बताया जाता है। हालांकि, दोष का वास्तविक प्रभाव कुंडली में मंगल और राहु की स्थिति, राशि, भाव, दृष्टि तथा अन्य ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है।
अंगारक दोष के निवारण के लिए ज्योतिषीय परंपराओं में हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार को व्रत, मंगल एवं राहु से संबंधित मंत्रों का जाप और जरूरतमंदों को दान करने की सलाह दी जाती है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिषी से जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाना उचित माना जाता है।

