केमद्रुम दोष वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा से संबंधित एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है। यह दोष सामान्यतः तब बनने की मान्यता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा से दूसरे और बारहवें भाव में कोई ग्रह न हो। चंद्रमा मन, भावनाओं, मानसिक शांति और संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए केमद्रुम दोष का संबंध मुख्य रूप से मानसिक स्थिति, आत्मविश्वास और जीवन में स्थिरता से जोड़ा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार केमद्रुम दोष के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक तनाव, अकेलापन, चिंता, अस्थिरता, निर्णय लेने में कठिनाई और जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में भी अस्थिरता की संभावना बताई जाती है। हालांकि, केवल चंद्रमा की स्थिति के आधार पर केमद्रुम दोष का निश्चित परिणाम नहीं बताया जा सकता। कुंडली में मौजूद शुभ ग्रहों की दृष्टि, चंद्रमा की राशि और स्थिति तथा अन्य राजयोगों का भी विचार किया जाता है।
केमद्रुम दोष के निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा, सोमवार का व्रत, शिवलिंग पर जल अर्पित करना और महामृत्युंजय मंत्र का जाप जैसे उपाय बताए जाते हैं। जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्तुओं का दान करना और माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करना भी शुभ माना जाता है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि केमद्रुम दोष हर कुंडली में समान प्रभाव नहीं देता। कई कुंडलियों में इसके प्रभाव को समाप्त या कम करने वाले योग भी मौजूद होते हैं। इसलिए किसी योग्य ज्योतिषी से संपूर्ण जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाकर ही दोष और उसके प्रभाव का सही आकलन करना उचित माना जाता है।

