मंगल दोष वैदिक ज्योतिष में विवाह से संबंधित प्रमुख दोषों में से एक माना जाता है। इसे मांगलिक दोष भी कहा जाता है। सामान्यतः जन्म कुंडली में मंगल ग्रह के कुछ विशेष भावों, जैसे लग्न, चंद्रमा या शुक्र से संबंधित स्थिति में होने पर मंगल दोष बनने की मान्यता है। मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, क्रोध, उत्साह और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसके अशुभ प्रभाव को वैवाहिक जीवन से जोड़ा जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल दोष के कारण विवाह में देरी, पति-पत्नी के बीच मतभेद, क्रोध, तनाव, आपसी समझ की कमी और दांपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। कुछ मामलों में पारिवारिक संबंधों और वैवाहिक स्थिरता पर भी इसका प्रभाव माना जाता है। हालांकि, केवल मंगल की स्थिति देखकर किसी व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। कुंडली में मंगल की शक्ति, राशि, भाव, शुभ ग्रहों की दृष्टि और अन्य योगों का भी अध्ययन किया जाता है।
मंगल दोष के निवारण के लिए हनुमान जी की पूजा, मंगलवार का व्रत, हनुमान चालीसा का पाठ और मंगल मंत्र का जाप जैसे उपाय बताए जाते हैं। जरूरतमंदों को दान करना और धार्मिक अनुष्ठान करना भी शुभ माना जाता है। कुछ परिस्थितियों में कुंडली मिलान के दौरान मंगल दोष का परिहार भी माना जाता है।
विवाह से पहले दोनों की जन्म कुंडली का विस्तृत मिलान करवाना उचित माना जाता है, ताकि मंगल दोष की स्थिति, प्रभाव और संभावित निवारण उपायों का सही आकलन किया जा सके।

