विवाह में देरी एक ऐसी स्थिति है जिसे वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली के विभिन्न ग्रहों और भावों के आधार पर समझने का प्रयास किया जाता है। विवाह के लिए मुख्य रूप से सातवां भाव, सप्तमेश, शुक्र और गुरु की स्थिति का अध्ययन किया जाता है।
लकी जेमस्टोन यानी शुभ रत्न वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करने के लिए पहने जाने वाले रत्न माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार प्रत्येक ग्रह से संबंधित विशेष रत्न होता है,
संतान से संबंधित समस्याएं वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण विषय मानी जाती हैं। जन्म कुंडली में संतान सुख का अध्ययन मुख्य रूप से पंचम भाव, पंचमेश, गुरु ग्रह और सप्तांश कुंडली के आधार पर किया जाता है।
रिश्तों में समस्या जीवन के मानसिक और भावनात्मक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। वैदिक ज्योतिष में प्रेम और संबंधों से जुड़ी परिस्थितियों का अध्ययन मुख्य रूप से पंचम भाव, सप्तम भाव, शुक्र, चंद्रमा और मंगल की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
विवाह में लगातार तनाव, मतभेद और भावनात्मक दूरी के कारण कई बार दांपत्य जीवन कठिन परिस्थितियों से गुजर सकता है। वैदिक ज्योतिष में वैवाहिक समस्याओं और तलाक की संभावनाओं का अध्ययन मुख्य रूप
पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और आपसी समझ का विशेष महत्व होता है। कभी-कभी गलतफहमी, संवाद की कमी, आर्थिक तनाव, पारिवारिक हस्तक्षेप या अलग-अलग अपेक्षाओं के कारण दांपत्य जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आर्थिक समस्या जीवन में तनाव और असुरक्षा का कारण बन सकती है। वैदिक ज्योतिष में धन और वित्तीय स्थिति का अध्ययन मुख्य रूप से द्वितीय भाव, एकादश भाव, पंचम भाव, नवम भाव तथा गुरु, शुक्र और बुध ग्रह की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
कोर्ट केस या कानूनी विवाद व्यक्ति के लिए मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और समय की चुनौती का कारण बन सकता है। वैदिक ज्योतिष में कानूनी मामलों और विवादों का अध्ययन मुख्य रूप से छठे भाव, छठे भाव के स्वामी, मंगल, शनि, राहु और दशा-अंतर्दशा के आधार पर किया जाता है।
